हायकू कविता

तुझ्या डोळ्यात
स्वतःला पहातो
पहातच रहातो
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तू माझी
मी तुझा
मंडपात काझी
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सांग कधी
होणार तू माझी
दूर कर शंका आधी
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कशाला पाहिजे
वशिला
सूर्याच्या तेजाला
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नको अशी
दूर तू जाऊस
अंतर वाढवूस
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पाहुनी तुझे सौदर्यं
देव हि यावा धरणीवर
तुझा होण्यास वर
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देव आकाशी राहतो
खाली पहातो
भक्ताला तारतो
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सांग भेटशील का
तिन्ही सांजेला
सूर्य मावळलेला
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नदी मिळे सागराला
पक्षी उडे आकाशाला
निसर्ग नटलेला
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नजर लागेल
तूला कोणाची
आंधळ्याची
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© महेश भा. रायखेलकर


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