काही हायकू
आपण चांगलं
तर जग चांगलं
आता समजलं
------------------
कशाला उगाच
खोटं बोलायचं
खरं वागायचं
------------------
भेट मला
एकदा निवांत
जिथे एकांत
------------------
भेट तुझी
कधी होणार
तुझा नकार
-----------------
कसं सांगू तुला
काय वाटतंय
कुठं उमगतंय
------------------
कोण म्हणतं
मी हरलो
जरा थांबलो
-----------------
उमगले ते
कोडे जे
मला पडले होते
-----------------
उगाच येथे
थांबू नकोस
जा तेथे
----------------
राहील मी
तुझ्या शिवाय
नाही पर्याय
---------------
गेला शीण
तुला पाहून
उतरला ताण
-------------
महेश भा रायखेलकर
आपण चांगलं
तर जग चांगलं
आता समजलं
------------------
कशाला उगाच
खोटं बोलायचं
खरं वागायचं
------------------
भेट मला
एकदा निवांत
जिथे एकांत
------------------
भेट तुझी
कधी होणार
तुझा नकार
-----------------
कसं सांगू तुला
काय वाटतंय
कुठं उमगतंय
------------------
कोण म्हणतं
मी हरलो
जरा थांबलो
-----------------
उमगले ते
कोडे जे
मला पडले होते
-----------------
उगाच येथे
थांबू नकोस
जा तेथे
----------------
राहील मी
तुझ्या शिवाय
नाही पर्याय
---------------
गेला शीण
तुला पाहून
उतरला ताण
-------------
महेश भा रायखेलकर

Comments
Post a Comment