हायकू कविता
स्वीकारले मी वास्तव
तू माझी होणार नाहीस
अपेक्षा अवास्तव
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तूही तीच
मीहि तोच
बदलला तो काळच
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जो तो म्हणतो
मीच खरा
खोट्याचा नखरा
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पैसे देवून
आयुष्य घेता येत नाही
टाका खर्च करून
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केल्याने अहंकार
माणसे दुरावतात
द्या त्यास नकार
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पुढारी पांढरे
कपडॆ घालतात
काळे कर्म करतात
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आल्याशिवाय आमंत्रण
परक्याकडे जावूं नये
अपमानास निमंत्रण
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तू बदललीस
मी नाही
प्रेमाला फसवलीस
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प्रत्येकात एक
लहान मुल दडलंय
हेच विसरलंय
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प्रेमाला वय
नसते
लग्नाचे असते
स्वीकारले मी वास्तव
तू माझी होणार नाहीस
अपेक्षा अवास्तव
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तूही तीच
मीहि तोच
बदलला तो काळच
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जो तो म्हणतो
मीच खरा
खोट्याचा नखरा
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पैसे देवून
आयुष्य घेता येत नाही
टाका खर्च करून
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केल्याने अहंकार
माणसे दुरावतात
द्या त्यास नकार
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पुढारी पांढरे
कपडॆ घालतात
काळे कर्म करतात
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आल्याशिवाय आमंत्रण
परक्याकडे जावूं नये
अपमानास निमंत्रण
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तू बदललीस
मी नाही
प्रेमाला फसवलीस
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प्रत्येकात एक
लहान मुल दडलंय
हेच विसरलंय
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प्रेमाला वय
नसते
लग्नाचे असते
© महेश भा. रायखेलकर

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